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Nutzer: Earl Klugh, Julian Bream, Carlos Barbosa-Lima, Romero Lubambo, Ignacio Rozas, Paulino Bernabe, Michael Thames, Max Strohmer, Kohno, Sakurai, Asturias guitars. zurück |
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Schon wieder neue Gitarrensaiten ? |
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Das Geheimnis der wirklich stimmenden Gitarrenmensur ist noch immer nicht endgültig gelöst; wie die Hölzer, Leime und Lacke akustisch aufeinander reagieren, darüber gibt es fast nur Vermutungen, Es gibt aber auch bei den Saiten sehr starke Unterschiede. Die beiden folgenden Diagramme sollen dies verdeutlichen: |
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Diagr.1 |
| Meistergit. ohne Stegzugabe, 1987, Nylon NT | |||||||
| 6 | Meßgerät: Seiko ST - 747 | ||||||
| Bd | E | A | d | g | h | e' | MW |
| 1 | 2 | 2 | 2 | 2 | 3 | 0 | 1,833 |
| 2 | 1 | 1 | 1 | 2 | 1 | -2 | 0,667 |
| 3 | 1 | 0 | 1 | 2 | 1 | -1 | 0,667 |
| 4 | 1 | 0 | 0 | 1 | 0 | -4 | -0,333 |
| 5 | 3 | 0 | 1 | 0 | -1 | -3 | 0,000 |
| 6 | 5 | 1 | 2 | 1 | 0 | 0 | 1,500 |
| 7 | 5 | 1 | 3 | -1 | -1 | -3 | 0,667 |
| 8 | 7 | 2 | 5 | 1 | 1 | -2 | 2,333 |
| 9 | 8 | 4 | 7 | 2 | 3 | -3 | 3,500 |
| 10 | 9 | 4 | 8 | 3 | 3 | -1 | 4,333 |
| 11 | 11 | 7 | 9 | 5 | 5 | 0 | 6,167 |
| 12 | 9 | 10 | 9 | 6 | 7 | 4 | 7,500 |
| 13 | 15 | 13 | 10 | 7 | 7 | 3 | 9,167 |
| 14 | 18 | 11 | 11 | 8 | 7 | 5 | 10,000 |
| 15 | 21 | 15 | 15 | 12 | 10 | 9 | 13,667 |
| 16 | 20 | 17 | 16 | 14 | 12 | 11 | 15,000 |
| 17 | 24 | 18 | 16 | 16 | 15 | 12 | 16,833 |
| 18 | 22 | 20 | 18 | 14 | 16 | 13 | 17,167 |
| 19 | 18 | 24 | 19 | 16 | 19,250 | ||
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Diagr. 1 Meistergitarre ohne Stegzugabe Nylonsaiten
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| Meistergit. ohne Stegzugabe, 1987, GSP Super | |||||||
| 6 | Meßgerät: Seiko ST - 747 | ||||||
| Bd | E | A | d | g | h | e' | MW |
| 1 | 2 | 2 | 0 | 2 | 0 | 1 | 1,167 |
| 2 | 0 | 2 | 1 | 3 | -1 | 0 | 0,833 |
| 3 | -2 | 1 | 1 | 3 | 0 | 0 | 0,500 |
| 4 | -2 | -1 | 0 | 0 | 0 | -1 | -0,667 |
| 5 | -1 | 0 | 1 | 0 | 2 | 0 | 0,333 |
| 6 | 3 | 0 | 0 | 2 | 1 | 0 | 1,000 |
| 7 | 0 | 1 | 0 | 1 | 1 | 0 | 0,500 |
| 8 | 2 | 1 | 2 | 2 | 2 | 0 | 1,500 |
| 9 | 6 | 1 | 6 | 3 | 2 | 2 | 3,333 |
| 10 | 4 | 4 | 6 | 2 | 4 | 5 | 4,167 |
| 11 | 6 | 5 | 5 | 7 | 5 | 4 | 5,333 |
| 12 | 7 | 4 | 9 | 5 | 7 | 8 | 6,667 |
| 13 | 8 | 8 | 12 | 7 | 8 | 11 | 9,000 |
| 14 | 5 | 8 | 10 | 6 | 6 | 7 | 7,000 |
| 15 | 13 | 12 | 15 | 10 | 11 | 13 | 12,333 |
| 16 | 18 | 18 | 14 | 14 | 15 | 17 | 16,000 |
| 17 | 19 | 20 | 16 | 16 | 17 | 20 | 18,000 |
| 18 | 21 | 22 | 19 | 19 | 17 | 20 | 19,667 |
| 19 | 23 | 22 | 22 | 25 | 23,000 | ||
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Diagr. 2 |
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Es handelt sich um die selbe Gitarre, allerdings mit verschiedenen Saiten. Diagr. 1: Markensaiten, normale Spannung: Diagr. 2: GSP- Saiten, normale Spannung (x - Achse: F ünde 1 bis XIX, y - Achse: Abweichung der Tonhöhen von der temperierten Stimmung, Angaben in Cent). Gemessen wurden die Tonhöhen aller Saiten auf allen Bünden, bezogen auf a' = 440 Hz. |
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Ein ähnliches Bild ergibt sich bei einer Gitarre mit außergewöhnlich guter Mensur: |
| Diagr. 3 Meistergitarre,sehr gute Mensur, normale Nylonsaiten, hohe Spannung | ||||||||
| Meistergit. 1979, Nylon HT | ||||||||
| 46 | Meßgerät: Osz.- Inst. f. Musikinstr.bau | |||||||
| Bd | E | A | d | g | h | e' | MW | |
| 1 | 0,0 | 0,5 | 0,0 | -0,5 | 1,0 | 0,0 | 0,167 | |
| 2 | -1,0 | -0,5 | 0,0 | 0,0 | 2,0 | 0,0 | 0,083 | |
| 3 | -1,0 | 0,0 | -0,5 | 0,0 | 2,5 | 0,0 | 0,167 | |
| 4 | -1,0 | 0,0 | -0,5 | -0,5 | 2,0 | 0,5 | 0,083 | |
| 5 | -0,5 | 0,0 | 0,0 | 0,0 | 2,5 | 1,0 | 0,500 | |
| 6 | -1,0 | -0,5 | 0,0 | 1,0 | 3,0 | 1,5 | 0,667 | |
| 7 | -1,5 | 0,0 | -0,5 | 1,5 | 3,0 | 2,0 | 0,750 | |
| 8 | -1,0 | 0,0 | -1,0 | 0,0 | 3,5 | 2,5 | 0,667 | |
| 9 | -1,0 | 0,0 | -0,5 | 0,5 | 3,5 | 1,5 | 0,667 | |
| 10 | -0,5 | 1,0 | 0,5 | 1,5 | 4,0 | 0,5 | 1,167 | |
| 11 | -1,0 | 0,5 | 1,5 | 2,5 | 5,0 | 1,5 | 1,667 | |
| 12 | -1,0 | 1,0 | 2,0 | 2,0 | 5,5 | 0,5 | 1,667 | |
| 13 | -1,5 | 0,5 | 0,5 | 4,0 | 5,0 | 0,0 | 1,417 | |
| 14 | -2,5 | 1,0 | 0,0 | 6,0 | 5,0 | 0,0 | 1,583 | |
| 15 | -2,0 | 0,5 | -0,5 | 8,0 | 4,0 | 0,0 | 1,667 | |
| 16 | -2,0 | 1,0 | -1,0 | 12,0 | 4,0 | 0,0 | 2,333 | |
| 17 | -1,0 | 2,0 | -0,5 | 8,0 | 5,0 | 0,5 | 2,333 | |
| 18 | -1,0 | 2,5 | -0,5 | 6,0 | 7,0 | 0,5 | 2,417 | |
| 19 | -2,0 | 0,5 | -0,750 | |||||
![]() |
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| Meistergit. 1979, GSP Ultra | ||||||||
| 46 | Meßgerät: Osz.- Inst. f. Musikinstr.bau | |||||||
| Bd | E | A | d | g | h | e' | MW | |
| 1 | 0,0 | 0,5 | 0,0 | -0,5 | 1,0 | 0,0 | 0,167 | |
| 2 | -0,5 | -0,5 | 0,0 | 0,0 | 2,0 | 0,0 | 0,167 | |
| 3 | -1,0 | 0,0 | -0,5 | 0,0 | 1,5 | 0,0 | 0,000 | |
| 4 | -1,0 | 0,0 | -0,5 | -0,5 | 1,5 | 0,5 | 0,000 | |
| 5 | -0,5 | 0,0 | 0,0 | 0,0 | 2,0 | 1,0 | 0,417 | |
| 6 | -0,5 | -0,5 | 0,0 | 0,5 | 1,5 | 1,5 | 0,417 | |
| 7 | -1,0 | 0,0 | 0,0 | 1,0 | 1,0 | 1,0 | 0,333 | |
| 8 | -1,0 | 0,0 | 0,0 | 1,5 | 1,5 | 0,5 | 0,417 | |
| 9 | -0,5 | 0,0 | 0,0 | 1,0 | 2,0 | 1,5 | 0,667 | |
| 10 | -0,5 | 0,5 | -0,5 | 0,5 | 2,5 | 1,5 | 0,667 | |
| 11 | 0,0 | 1,0 | 0,0 | 1,5 | 3,0 | 1,5 | 1,167 | |
| 12 | 0,5 | 1,0 | -0,5 | 2,0 | 2,5 | 0,5 | 1,000 | |
| 13 | 0,0 | 0,5 | 0,0 | 2,5 | 2,0 | 0,5 | 0,917 | |
| 14 | 0,5 | 1,0 | 0,0 | 3,0 | 2,5 | 0,0 | 1,167 | |
| 15 | 0,5 | 0,5 | -0,5 | 2,5 | 3,0 | 0,0 | 1,000 | |
| 16 | 1,0 | 1,0 | -1,0 | 3,0 | 2,5 | -0,5 | 1,000 | |
| 17 | 1,0 | 2,0 | -0,5 | 4,5 | 2,0 | 0,0 | 1,500 | |
| 18 | 0,5 | 2,5 | -0,5 | 5,0 | 2,5 | 0,5 | 1,750 | |
| 19 | 0,5 | 1,0 | 0,750 | |||||
Diagr. 4 Meistergitarre, sehr gute Mensur GSP-Ultra Nylons |
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Auch hier liegen die Tonhöhen der GSP - Saiten im gesamten Bereich wieder sehr eng bei einander.
Was bedeutet das?
Mit guten Saiten kann man sogar ausgesprochen mittelmäßigen Gitarren noch relativ schöne Klänge entlocken: mit schlechten Saiten klingt nicht einmal ein gutes Instrument. GSP - Saiten gehören zu den besten Nylonsaiten.
Was steckt dahinter?
Die Gitarre kann nur das als Klang übertragen, was ihr von den Saiten angeboten wird. Jeder Gitarrenton besteht aus bis zu 35 Teiltönen. Der jeweils tiefste Teilton ist der Grundton. Wenn die Grundtöne nicht genau stimmen, dann stimmen auch die darüber liegenden Obertöne nicht. Obertöne, die zueinander nicht harmonisch sind, können sich gegenseitig behindern, ja sogar auslöschen, Akkorde klingen matt, stumpf oder einfach falsch. Stehen die Obertöne in einem harmonischen Verhältnis, dann stützen sie sich gegenseitig. Ihre Energien addieren sich und der Klang wird voller und schöner. Die Zusammenhänge sind in der Physik. unter dem Oberbegriff Resonanz bekannt.
Allerdings muss man nicht Physiker werden, um Gitarre spielen zu können. Es reicht aus, wenn man fleißig übt und alle paar Monate gute Saiten aufzieht. Alles andere passiert dann wie von selbst...